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उन दिनों हीरोइन वो होती थी जो समझौता और त्याग करती थी- नीना गुप्ता ने खोले बॉलीवुड के राज! | bollywood – News in Hindi


उन दिनों हीरोइन वो होती थी जो समझौता और त्याग करती थी- नीना गुप्ता ने खोले बॉलीवुड के राज!

नीना गुप्ता (Photo Credit- @neena_gupta/Instagram)

नीना गुप्ता (Neena Gupta) ने बॉलीवुड (Bollywood) में हीरोइन (Heroine) के चुनाव और एक्टर्स की पब्लिक इमेज के कारण काम पर पड़ने वाले असर को लेकर बात की है. इस दौरान उन्होंने ये भी बताया कि उन्हें यंग एज में लीड रोल क्यों नहीं मिले?

मुंबई. बॉलीवुड की जानी-मानी एक्ट्रेस नीना गुप्ता ने हाल ही में बताया है कि किस तरह उनकी पब्लिक इमेज ने उनके काम पर असर डाला था. जिसके चलते यंग एज में मिलने वाले मिलने वाले रोल्स को लेकर भी मुश्किल हो रही थी. इंडस्ट्री में एक दशक बिताने के बाद वो यहां कि टॉप सेलेब्रिटीज में शुमार हो चुकी हैं कि, 2 साल पहले उन्होंने बधाई हो से ऐसा कमबैक किया कि लोगों ने उनकी तारीफों के पुल बांध दिए. वहीं नीना गुप्ता ने अपने लेटेस्ट इंटरव्यू में खुद के और इंडस्ट्री में एक्ट्रेसेस के साथ होने वाले बर्ताव के बारे में खुल बातें शेयर की हैं.

नीना गुप्ता ने अपनी इमेज का काम पर पड़ने वाले असर के बारे में बताते हुए टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा– ‘जब मैं ये कहती हूं कि मेरी इमेज एक स्ट्रॉन्ग महिला की थी तो मैं मीडिया द्वारा बनाई गई इमेज के बारे में बात कर रही हूं. मैं असल जिंदगी में कैसी हूं ये किसी को नहीं पता है. शायद मैं पर्सनल लाइफ में स्ट्रॉन्ग नहीं हूं, किसी को कैसे पता होगा? उन दिनों में हीरोइनों को एक स्ट्रॉन्ग नहीं दिखाया जाता था. वो एक ऐसी महिला होती थी जिसने परिस्थितियों से समझौता किया है और बहुत बलिदान दिए हैं.

नीना गुप्ता ने आगे कहा- ‘एक एक्टर को बहुत सावधान रहना पड़ता है कि मीडिया उनकी इमेज क्या बना रही है. जैसे इंटरव्यूज में क्या बोलना है और क्या नहीं बोलना है और उन्हें कहां पर खुद को रोकना है. उन दिनों हममें से कुछ लोग बेहद अनुभवहीन थे. किसी ने कुछ बोल दिया तो उसको कुछ बता दिया. फिर एक के बाद एक बात कहां से कहां चली जाती थी. मतलब कुछ और निकल जाता था. मैं पब्लिक फिगर हूं तो मेरे लिए कुछ फायदे हैं तो कुछ नुकसान भी हैं. मैं जो बोल रही हूं मुझे उस पर शिष्टाचार बनाए रखना सीखना होता है’.

उनका कहना है कि ‘हमारे यहां (फिल्म इंडस्ट्री में) आपको रोल आपकी इमेज के हिसाब से मिलते हैं. लॉजिक के मुताबिक ये काफी फनी है, क्योंकि अगर ऐसा है तो डॉक्टर या लॉयर का रोल करने के लिए किसी डॉक्टर या लॉयर को ही लिया जाना चाहिए. क्या एक एक्टर वो नहीं है जो हर तरह का रोल कर सकता है? हम क्यों टाइप कास्ट करते हैं? हां अब ये चीजं बदल रही हैं’.





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