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महमूद बर्थ एनिवर्सरीः जब अमिताभ बच्चन ने दोस्त का दिल दुखाया | bollywood – News in Hindi


महमूद बर्थ एनिवर्सरीः जब अमिताभ बच्चन ने दोस्त का दिल दुखाया

अमिताभ बच्चन और महमूद.

महमूद (Mehmood), अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) को अमित कहकर बुलाया करते थे और उन्हें अपने बेटे जैसा मानते थे. फिल्मों में अमिताभ के 25 साल पूरे होने के मौके पर महमूद ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए कहा था कि वो दुआ करते हैं कि अमिताभ की जिंदगी में ऐसी कई सिल्वर जुब्लियां आएं.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    September 29, 2020, 8:54 AM IST

मशहूर कॉमेडियन चार्ली चैपलिन ने कहा था ‘जब जिंदगी को क्लोज अप में देखा जाता है तो वो एक ट्रेजडी मालूम होती है लेकिन लॉन्ग शॉट में देखने पर ये किसी कॉमेडी की तरह लगती है.’ अभिनेता महमूद अपनी एक्टिंग के जरिए अक्सर लोगों को गुदगुदा दिया करते थे लेकिन उनकी निजी जिंदगी में ट्रेजडी गेस्ट अपियरेंस की तरह नहीं बल्कि मुख्य किरदार की तरह थी क्योंकि उन्होंने अपनी जिंदगी में हर कदम पर किसी न किसी ट्रेडजी का सामना किया.

महमूद अपनी आलीशान लाइफ स्टाइल के लिए जाने जाते थे और एक वक्त पर उनके पास 24 कारें हुआ करती थी. इनमें उस वक्त के मशहूर ब्रांड जैसे स्टिंगरे, डॉज, इंपाला और एमजी की कारें शामिल थीं. महमूद के भाई अनवर अली ने 2015 में फिल्मफेयर को दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि अमिताभ अपनी गर्लफ्रेंड को इंप्रेस करने के लिए अक्सर महमूद के कार कलेक्शन में से कार ले जाया करते थे. अनवर ने इस इंटरव्यू में बताया था कि महमूद ने ऑस्टिन नामक एक कार मकैनिक को घर में ही रखा हुआ था, जो कई बार महमूद के कहने पर कार का रंग उनके सूट के रंग के साथ मैच किया करता था. महमूद को अगर इसके लिए 1 लाख रुपये भी खर्च करने पड़ते थे तो वो हिचकते नहीं थे.

महमूद का सिर्फ जिंदगी जीने का तरीका ही बड़ा नहीं था बल्कि उनका दिल भी काफी बड़ा था. कहा जाता है कि जब अमिताभ बच्चन बॉलीवुड में पांव जमाने के लिए संघर्ष कर रहे थे तब महमूद ने उनकी काफी मदद की थी. महमूद ने ही बतौर प्रोड्यूसर अपनी फिल्म ‘बॉम्बे टू गोवा’ में अमिताभ बच्चन को लीड रोल दिया था बतौर लीड हीरो ये अमिताभ बच्चन के करियर की पहली फिल्म थी. महमूद का अमिताभ से काफी लगाव था और वो अक्सर कहा करते थे कि ये बहुत आगे जाएगा.

ये वो वक्त था जब अमिताभ बच्चन को फिल्मों में सफलता नहीं मिल रही थी. लेकिन महमूद ने शायद ये भांप लिया था कि लंबी कद काठी का ये दुबला पतला हीरो आने वाले वक्त में हिंदी सिनेमा का महानायक बन जाएगा. अमिताभ की दोस्ती महमूद के भाई अनवर अली से फिल्म ‘सात हिंदुस्तानी’ के दौरान हुई थी. अमिताभ बच्चन कई दिनों तक अनवर अली के साथ उनके अपार्टमेंट में रहे थे जो कि महबूब की ही रेसिडेंशियल प्रॉपर्टी पर बना था. अमिताभ बच्चन ने इन बातों का जिक्र खुद 2012 में अपने एक ब्लॉग में किया था.अमिताभ महमूद को भाईजान कहकर बुलाया करते थे. वैसे महमूद को उनके चाहने वाले और करीबी अक्सर इसी नाम से बुलाया करते थे और उनके गले में अक्सर भाईजान लिखा हुआ एक लॉकेट भी लटकता रहता था. महमूद अमिताभ को अमित कहकर बुलाया करते थे और उन्हें अपने बेटे जैसा मानते थे. फिल्मों में अमिताभ के 25 साल पूरे होने के मौके पर महमूद ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए कहा था कि वो दुआ करते हैं कि अमिताभ की जिंदगी में ऐसी कई सिल्वर जुब्लियां आएं.

महमूद को अमिताभ बच्च की फिल्म ‘कभी कभी’ का गाना ‘कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है’ बहुत पसंद था. महमूद ने इस इंटरव्यू में कहा था कि जिस भी आदमी को कामयाबी मिलती है उसके दो पिता होते हैं एक वो जो जन्म देता है और दूसरा वो जो पैसा कमाना सिखाता है. महमूद ने कहा था कि वो अमिताभ बच्चन के वो पिता है जिन्होंने उन्हें कमाना सिखाया.

महमूद के मुताबिक अमिताभ के मन में उनके लिए इतनी इज्जत थी कि अगर वो उनकी आवाज भी सुन लेते थे तो सम्मान में अपनी सीट से खड़े हो जाते थे. महमूद और अमिताभ के बीच बेहद मधुर संबंध था लेकिन वक्त के साथ दोनों के रिश्तों में एक दूरी आ गई. महमूद ने एक इंटरव्यू में बताया था कि जब अमिताभ बच्चन के पिता हरिवंश राय बच्चन गिर गए थे तब महमूद उन्हें देखने अमिताभ के घर गए लेकिन इसके एक-दो हफ्तों बाद जब महमूद की बायपास सर्जरी हुई तो अमिताभ उन्हें देखने नहीं गए.

महमूद के मुताबिक वो उस वक्त मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती थे और अमिताभ वहां अपने पिता का इलाज कराने पहुंचे थे लेकिन अमिताभ ने उनका हाल चाल नहीं लिया और यहां तक कि उन्हें जल्दी ठीक होने के लिए शुभकामना तक नहीं दी. महमूद का कहना था कि उन्हें इस बात से बहुत ठेस पहुंची क्योंकि उन्हें अमिताभ से ऐसे बर्ताव की उम्मीद नहीं थी. महमूद का निधन 23 जुलाई 2004 को अमेरिका के पेनसिलवेनिया में हो गया था. इसके बाद उनका शव मुंबई के महबूब स्टूडियो में दर्शनों के लिए रखा गया था.

महमूद के भाई के मुताबिक महमूद की मौत से दुखी अमिताभ बच्चन ने 5 दिनों तक कोई काम नहीं किया था. 2012 में अमिताभ ने एक ब्लॉग में महमूद को याद करते हुए लिखा था कि जब महमूद भाई का शव महबूब स्टूडियो में रखा हुआ था तब वो उनके अंतिम दर्शनों के लिए वहां नहीं गए थे. अमिताभ के मुताबिक उनमें हिम्मत नहीं थी कि वो एक ऐसी व्यक्ति का मृत शरीर देखें जो हमेशा लोगों को जीना सिखाता था और हंसाता रहता था.





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