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रक्षा सौदों में ऑफसेट पॉलिसी क्या होती है? जानें क्या है टेक्नॉलजी ट्रांसफर का प्रावधान


नई दिल्ली
भारत सरकार ने अपनी नई रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP) में सरकार से सरकार के बीच और किसी एक कंपनी के साथ हुए रक्षा सौदे को ऑफसेट पॉलिसी से मुक्त कर दिया है। नई नीति 1 अक्टूबर से लागू हो जाएगी। इससे पहले, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने ऑफसेट पॉलिसी के तहत विदेशी रक्षा कंपनियों की तरफ से टेक्नॉलजी ट्रांसफर नहीं किए जाने पर नाराजगी प्रकट की गई।

कैग ने खोली ऑफसेट पॉलिसी की कलई

कैग ने खासतौर पर फ्रांस से 59 हजार करोड़ रुपये के राफेल डील का हवाला दिया और कहा कि यह फाइटर जेट बनाने वाली कंपनी दसॉ एविएशन और इसमें लगे हथियारों की सप्लाई करने वाली कंपनी एमबीडीए ने भारत को टेक्नॉलजी ट्रांसफर नहीं की। ध्यान रहे कि राफेल डील में पॉलिसी के तहत 30% की जगह 50% कल-पुर्जे भारत में बनने थे। बहरहाल, सीएजी ने संसद में पेश अपनी रिपोर्ट में पूरी ऑफसेट पॉलिसी में बड़े बदलाव की दरकार बताई।

क्या है ऑफसेट पॉलिसी?
दरअसल, ऑफसेट पॉलिसी के तहत विदेशी रक्षा उत्पादन कंपनियों को 300 करोड़ रुपये से अधिक के डील के लिए कुल वैल्यू का कम-से-कम 30 प्रतिशत भारत में खर्च करना अनिवार्य होता है। विदेशी कंपनियों को यह खर्च कलपुर्जों की खरीद, टेक्नॉलजी ट्रांसफर या अनुसंधान और विकास (R&D) इकाइयों की स्थापना में करना होता है। ऑफसेट पॉलिसी का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि जब भारत रक्षा उपकरणों की खरीद का ऑर्डर दे तो साथ में टेक्नॉलजी ट्रांसफर भी हो ताकि देश में रक्षा उपकरणों के निमार्ण को बढ़ावा मिल सके और विदेशी निवेश भी हासिल हो।

CAG ने बताया, Rafale बनाने वाली कंपनी ने पूरा नहीं किया अपना वादा

नई DAP में जरूरत के उपकरण तुरंत लीज पर लेने की अनुमति
हालांकि, रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने स्वीकार किया कि 2008 में लाई गई ऑफसेट पॉलिसी से अब तक रक्षा सौदों की लागत ही बढ़ी, भारत को विदेशों से कुछ खास सैन्य तकनीक हासिल नहीं हो पाई है। उनका कहना है कि ऑफसेट पॉलिसी के कारण विदेशी कंपनियां रक्षा उपकरणों के दाम 8 से 10 प्रतिशत तक बढ़ा जरूर देते हैं, लेकिन टेक्नॉलजी ट्रांसफर को लेकर उत्साहित नहीं दिखते।

रक्षा मंत्रालय में अधिग्रहण महानिदेशक अपूर्व चंद्रा ने कहा, ‘सरकार से सरकार के बीच एवं अंतर-सरकारी समझौतों और सिंगल वेंडर डील पर ऑफसेट लागू नहीं होगा।’ अब नई डीएपी के तहत अब सशस्त्र बलों को ट्रांसपोर्ट प्लेन, हवा में ईंधन भरने वाले प्लेन, हेलिकॉप्टर, सिम्युलेटर जैसे तात्कालिक जरूरत के रक्षा उपकरणों को तुरंत लीज पर लेने की अनुमति गई है।



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