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‘लफंगे, बदमाश तक चुनाव लड़ते हैं, अगर मैं लड़ता हूं तो क्या गलत है?’


पटना
बिहार के डीजीपी रहे गुप्तेश्वर पांडेय इन दिनों चर्चा में हैं। उन्होंने वीआरएस लेकर राजनीति में किस्मत आजमाने का फैसला किया है। वीआरएस लेने से पहले सुशांत सिंह राजपूत केस में वे काफी मुखर रहे, उनके बयान ही भविष्य में उनके राजनीति में आने का संकेत देने लगे थे। वीआरएस लेने के बाद रविवार को आखिरकार वे जेडीयू में शामिल हो ही गए। उनका चुनाव लड़ना भी तय माना जा रहा है। एनबीटी नेशनल ब्यूरो के विशेष संवाददाता राजेश चौधरी ने गुप्तेश्वर पांडेय से बात की। बातचीत के मुख्य अंश :

सवाल : अभी आपकी सर्विस बाकी थी, राजनीति में आने की इतनी हड़बड़ी क्यों रही कि आपने वीआरएस लेने का फैसला किया?

गुप्तेश्वर पांडेय: सुशांत की मौत के बाद का जो घटनाक्रम रहा, उसको लेकर कुछ लोगों ने मुझे विवाद में डालने की कोशिश की। पॉलिटिकल एंगल तलाशे जाने लगे। मेरे 34 साल के बेदाग करियर पर दाग लगाने की कोशिश की जा रही थी। मेरे सामने एक विकल्प यह था कि चुप रहकर अपने दामन को दागदार होने देता, लेकिन यह मुझे मंजूर नहीं था। इसलिए मैंने वीआरएस लेना पसंद किया, भले ही मेरी सर्विस अभी बाकी रही हो।

सवाल: वैसे आपने 2009 में भी वीआरएस लिया था, लेकिन फिर नौकरी में वापसी कर ली थी। क्या वजह थी? कहा जाता है कि उस वक्त आप बक्सर से चुनाव लड़ना चाह रहे थे, लेकिन टिकट नहीं मिला था?

गुप्तेश्वर पांडेय: हां, तब मैंने मन बनाया था कि राजनीति जॉइन करूं। मैंने सोचा था कि बक्सर से स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ूंगा, लेकिन शुभचिंतकों ने सलाह दी कि चुनाव में कई फैक्टर काम करते हैं। बिना किसी पार्टी के टिकट के चुनाव लड़ना ठीक नहीं होगा। इसीलिए मैंने चुनाव नहीं लड़ा और नौकरी में वापस आने का फैसला किया।

सवाल: इस बार चुनाव लड़ना तो तय ही है?

गुप्तेश्वर पांडेय: मैंने नीतीश कुमार को अपना नेता मान लिया है, उनका जो आदेश होगा, उसका पालन करूंगा। 34 साल के बेदाग करियर में मैंने लगातार जनता की सेवा की है, आगे भी करता रहूंगा। सोने का चम्मच लेकर पैदा नहीं हुआ। गरीब परिवार का हूं। मेरे माता-पिता पढ़े लिखे नहीं थे, लेकिन उन्होंने मुझे पढ़ाया और उनके आशीर्वाद से मैं आईपीएस बना। मुझे बिहार के तमाम जिले के लोग अपने यहां से चुनाव लड़ने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं। लुच्चे, लफंगे, शातिर बदमाश तक जब चुनाव लड़ते हैं, तो मैं चुनाव लड़ता हूं तो उसमें गलत क्या होगा? मेरे चुनाव लड़ने पर इतने सवाल क्यों?

सवाल: सरकार के शीर्ष पदों पर बैठे सरकारी कर्मचारियों की राजनीति में आने की इच्छा क्या उन्हें राजनीतिक दलों के प्रति वफादार बनाने के लिए प्रेरित नहीं करती?

गुप्तेश्वर पांडेय: मैंने सरकारी सेवा में रहते हुए निष्पक्ष होकर काम किया। राजनीति में आने का मेरा फैसला इसलिए है कि मुझे लगता है कि राजनीति सबसे अच्छा प्लेटफॉर्म है, जहां से लोगों की सेवा की जा सकती है। मुझे अब न नाम की जरूरत है और न पैसे की। अगर पैसे की जरूरत होती, तो तमाम निजी कंपनियों से सर्विस के ऑफर थे, लेकिन मैंने जनसेवा का रास्ता चुना।

सवाल: सुशांत केस में सरकारी सेवा में रहते हुए आपके बयान बिल्कुल नेताओं की तरह आ रहे थे। उसकी क्या वजह थी?

गुप्तेश्वर पांडेय: सुशांत को न्याय दिलाने के लिए मुझे मीडिया के सामने आना पड़ा। क्या सीबीआई जांच की सिफारिश करना और हमारा केस दर्ज करना गलत था? बिल्कुल नहीं। सुशांत केस में सचाई और न्याय के लिए मैंने मुखर होकर बयान दिया। अब लोग ट्रोल करने लगे और मामले को अलग रंग देने लगे तो क्या मैं गाली के डर से चूहे की तरह बिल में छुप जाता? मुझे नहीं लगता कि मैंने कुछ गलत किया या गलत बोला।

सवाल: रिया की औकात वाले बयान को लेकर भी क्या आपको खेद नहीं हुआ? वह बयान तो किसी भी तरह एक डीजीपी का नहीं हो सकता था?

गुप्तेश्वर पांडेय: उस बयान को लोगों ने गलत तरीके से परिभाषित किया। रिया के खिलाफ सुशांत के पिता ने बिहार में केस दर्ज कराया है। रिया बिहार में आरोपी है, उस नजरिए से मेरे कहने का आशय था कि रिया का स्टेचर नहीं है कि वह संवैधानिक पद पर बैठे लोगों के खिलाफ टिप्पणी करे। वैसे मेरा इरादा किसी की भावनाओं को आहत करने का नहीं था।

सवाल: 34 साल पुलिस सेवा का क्या अनुभव रहा? कहा जाता है कि राजनीतिक दखलंदाजी लगातार बढ़ रही है?

गुप्तेश्वर पांडेय:
मैंने कई मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में काम किया। डॉ. जगन्नाथ मिश्र, लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, नीतीश कुमार, सभी के साथ। मेरे कार्यकाल में कोई दखलंदाजी नहीं हुई। मैंने ईमानदारी से अपने कर्तव्य का निर्वाह किया।

सवाल: दखलंदाजी न सही, लेकिन किसी तरह प्रलोभन कभी आपको दिया गया हो?

गुप्तेश्वर पांडेय:
मुझे कभी भी किसी तरह से किसी भी राजनीतिक पार्टी की ओर से प्रभावित करने की कोशिश नहीं की गई, क्योंकि यह सभी को मालूम था कि मैं प्रलोभन में आने वाला नहीं हूं। जो कानूनन सम्मत होगा, वही करूंगा। मुझे संतोष है कि मैंने सेवाकाल में कोई समझौता नहीं किया।

सवाल: ऐसा कुछ जो आप पुलिस सेवा में रहते हुए करना चाहते रहे हों और न कर पाए हों?

गुप्तेश्वर पांडेय:
हर किसी को न्याय मिले, खासतौर से गरीबजन को, यह मेरी पुलिस सेवा का ध्येय रहा है। गरीब से गरीब व्यक्ति, जिसके पास कोई सिफारिश नहीं होती थी, मैं उससे मिलता था और उसकी शिकायत पर सर्वोच्च प्राथमिकता से कार्रवाई सुनिश्चित कराता था। यह सिलसिला आगे भी जारी रहे, इसीलिए राजनीति में आया हूं।



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